सही शिशु विशेषज्ञ का चुनाव कैसे करे

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Simranjit Kaur

Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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मेडिकल देखभाल शिशु और माता दोनो के लिए बहुत ही ज़रूरी चीज़ है। इस लिए बहुत लोगो का मानना है कि आपको किसी शिशु विशेषज्ञ का चुनाव शिशु के आने से काफ़ी पहले कर लेना चाहिए। पर यहाँ पर सवाल यह उठता है कि सही शिशु विशेषज्ञ का चुनाव कैसे करे ख़ासतौर पर जब बाज़ार मे पहले से ही अनेकों शिशु विशेषज्ञ उपस्थित है।

डॉक्टर और मरीज़ के बीच एक बेहतर तालमेल होना बहुत जरूरी है। यह तालमेल इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कितने बेहतरीन शिशु विशेषज्ञ का चुनाव किया है। इसके साथ ही आपको किसी ऐसे शिशु विशेषज्ञ का चुनाव करना चाहिए जो ना सिर्फ़ बच्चे के जन्म से पहले आपको मेडिकल सहायता दे बल्कि शिशु के जन्म के बाद भी आपकी मदद करता रहे।

शिशु विशेषज्ञ के चुनाव के लिए सबसे बेहतरीन समय है गर्भावस्था मे 28 से 34वा हफ़्ता क्योंकि इस समय मे अगर आप चुनाव शुरू करेंगे तो आपके पास बहुत समय होगा एक सही शिशु विशेषज्ञ का चुनाव करने के लिए।

लोगों की राय

जब आप किसी शिशु विशेषज्ञ का चुनाव करने की शुरुआत करते हैं तो सबसे पहले आप लोगों की राय से शुरू कर सकते है। यक़ीनन आपके इर्दगिर्द बहुत से लोग, रिश्तेदार, सहकर्मी होंगे जो इस दौर से निकल चुके होंगे। आप उनकी सलाह ले सकते है और उनके रिव्यू ले सकते है। अगर आपने किसी शिशु विशेषज्ञ का चुनाव कर लिया है तो आप उसके बारे मे भी बात कर सकते है।

कई बार बहुत सी मेडिकल बीमा देने वाली संस्थाओं के पास एक खास किस्म का डेटबेस होता है जिसको देख कर वो आपको किसी अनुभवी शिशु विशेषज्ञ के बारे मे बता सकते हैं।

इन सब सलाहों के आधार पर जब आप एक सूची तैयार कर लेते हैं तो आप उस सूची को अपनी ज़रूरतों के हिसाब से और भी छोटा कर सकते है, जैसे कि आपको किसी खास किस्म के विशेषज्ञ की जरूरत तो नहीं है या आपके घर के पास कौन सा विशेषज्ञ आसानी से उपलब्ध है।अगर बात किसी अस्पताल को चुनने की है तो आप बिना सोचे किसी प्रतिष्ठित अस्पताल पर ही यकीन करेंगे।

आमने सामने बैठ कर बातचीत करके

बताए गए समय मे से कोई एक दिन निकल ले और उस शिशु विशेषज्ञ से मिले। इस मुलाकात का एकलौता मकसद उस शिशु विशेषज्ञ के बारे मे ज़्यादा से ज़्यादा जानना ही होगा।

आपको अपने शिशु के जन्म के ठीक बाद आने वाली संभावित परेशानियो के बारे एक सूची बना लेनी चाहिए। इस सूची मे सवालों के साथ-साथ अगर आपके मन मे किसी चीज़ को जानने की उत्सुकता है, तो वो भी लिख ले।

जब भी आप उस शिशु विशेषज्ञ से मिले, तो उससे यह सब सवाल करे। इससे एक तो आपको अपने शिशु विशेषज्ञ के अनुभव के बारे मे समझ आ जाएगा और साथ ही आप यह भी जान लेंगी की वह शिशु विशेषज्ञ आपके सवालो को कितनी विनम्रता से सुनता है और उत्तर देता है।

डॉक्टर और मरीज का आपसी तालमेल

यहाँ पर कुछ केस मे तो माताएँ किसी ऐसे नौजवान शिशु विशेषज्ञ को पसंद करती है जो नई तकनीकों के बारे मे जानता हो और कुछ माताएँ ऐसे शिशु विशेषज्ञ को पसंद करती हैं जो पुराना और ज़्यादा अनुभवी हो। दोनो अपनी अपनी जगह पर ठीक है।

सबसे जरूरी बात यहाँ पर यह है कि आपका अपने शिशु विशेषज्ञ से आपका तालमेल कैसा है और आप उसकी उपस्थिति मे कितना आरामदायक महसूस करते।

आपके शिशु विशेषज्ञ की उपलब्धता

यह एक बहुत ही जरूरी पहलू है। साथ ही आपको यह जानना भी बहुत जरूरी है कि डॉक्टर के इलावा उसके स्टाफ की क्या रिपोर्ट है? आपको उस शिशु विशेषज्ञ की क्लिनिक की हालत के बारे मे जान लेना बहुत जरूरी है।

कहीं आप किसी ऐसे शिशु विशेषज्ञ को तो नहीं चुन रहे जिसकी फोन लाइन हमेशा व्यसत रहती है क्योंकि यह आपके शिशु की सुरक्षा के लिए बिल्कुल भी सही नही है। ऐसा ना हो की आप जरूरत के वक़्त उसको कॉल करे और आपकी उससे बात ही ना हो पाए।

शिशु विशेषज्ञ की उपस्थिति बहुत ही ज़रूरी चीज़ है। शिशु विशेषज्ञ के चुनाव से पहले उससे यह ज़रूर पूछे कि क्या वह आपको काम के घंटो के बाद भी आपकी परेशानी के लिए उपलब्ध करवा पाएगा या नहीं? बदक़िस्मती से अगर आपका शिशु रात मे बीमार पड़ जाए तो क्या आपका शिशु विशेषज्ञ फोन उठाएगा या उसको कोई नर्स?

शिशु विशेषज्ञ का बदलाव

बहुत बारी ऐसा भी होता है कि शुरुआत मे तो शिशु विशेषज्ञ बहुत से अच्छे तरीके से बातचीत करते है और बाद मे नखरे करने लगते है। ऐसा केस मे आपको आपना शिशु विशेषज्ञ बदलने मे कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।

जब भी आप अपने शिशु विशेषज्ञ के व्यवहार मे कोई ग़ैरज़रूरी बदलाव देखे तो उसको बदल देने मे ही आपकी और आपके शिशु की भलाई है।

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