शिशु की कब्ज़ ठीक करने के कारगर उपाय

अगर आपने हमारा कब्ज़ के कारणों के बारे में लिखा गया लेख पढ़ा है, तो अभी तक आप जान ही गए होंगे कि शिशुओं में कब्ज़ के क्या प्रमुख कारण होते हैं। जब आपका बच्चा कब्ज़ से परेशान होता है, तो आप हर वह चीज़ करने का प्रयास करते हैं, जिससे आपको लगता है कि शिशु को आराम आएगा। वहीँ दूसरी और एक कड़वा सच यह भी है कि आपकी लाख कोशिशों के बाद भी शिशु को आप कोई खास आराम दिलवा पाने में सफल नहीं होते। आपकी इसी मुश्किल को दूर करने के लिए, इस लेख के माध्यम से मैं कुछ ऐसे उपाय आपके शिशु की कब्ज़ ठीक करने के कारगर उपाय बताउंगी, जिनसे उसको कब्ज़ की समस्या से वास्तव में आराम मिलेगा।

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पानी का सेवन बढ़ा दें

इस बात में कोई आशंका नहीं है कि चाहे शिशु हो या व्यस्क, जितना ज्यादा आप पानी का सेवन करेंगे, उतना ही आपको कब्ज़ से छुटकारा मिलेगा। अगर आपका शिशु 6 महीने या उससे बढ़ा है, तो इस बात को पक्का करें कि वह निर्धारित मात्रा में पानी का सेवन ज़रूर करे। 6 महीने के शिशु के लिए 2 औंस अर्थात 50 से 60 मिलीलीटर पानी बहुत होगा। जब आपका बच्चा पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड होता है, तो उसको कब्ज़ की शिकायत नहीं रहती।

आहार को प्यूरी के रूप में दें

आहार विविधीकरण की प्रक्रिया में जब शिशुओं को ठोस आहार दिया जाता है, तो वह उसे चबा पाने में सक्षम नहीं होते और इसी कारण से भोजन पचा नहीं पाते। इसलिए हम सुझाव देना चाहेंगे कि अगर आपके शिशु ने हाल ही में ठोस आहार शुरू किया हो, तो उसे शुरआत में आहार प्यूरी के रूप में दें। इससे वह भोजन को जल्दी से पचा पाएंगे और उनको कब्ज़ नहीं होगी। इसके साथ ही अगर फलों और सब्ज़ियों को प्यूरी के रूप में देंगे, तो उनको पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिलेगा।

फार्मूला मिल्क बदल कर देखें

शिशुओं में कब्ज़ का एक प्रमुख कारण फार्मूला मिल्क भी होता है। कई बार शिशु उसको दिए जाने वाला फार्मूला मिल्क के अनुकूल प्रतिक्रिया देता है, और कई बार प्रतिकूल। अगर फार्मूला मिल्क देने के बाद आपके बच्चे को कब्ज़ हो, तो आपको उसका फार्मूला मिल्क बदलने के बारे में भी विचार करना चाहिए। अगर समस्या फार्मूला मिल्क ही है, तो इसे बदलने से भी शिशु को राहत मिल जाती है।

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पेट की मसाज

यह भी कब्ज़ से राहत के लिए एक लाभकारी उपाय है। धीरे से अपने बच्चे को पीठ के बल लिटा दें और कुछ नारियल तेल ले कर, हल्के हाथों से उसके पेट पर लगाएं। फिर उसके पेट पर घड़ी की गति में मालिश करें। सावधान रहें, आपको ज़्यादा बहुत दबाव नहीं डालना है।

यह तकनीक तब काम करती है जब आपके बच्चे की कब्ज का कारण दूध होता है। हालांकि, जब बच्चे को कब्ज होती है, संभावना है कि वह आपको पेट को छूने नहीं देंगे क्योंकि उसको यह स्पर्श भी तकलीफ देता है।

ग्लिसरीन सपोसिटरी का उपयोग करना

बच्चों की कब्ज़ का अंतिम उपाय ग्लिसरीन का बुलेट के आकार का कैप्सूल है, जिसे उनके शौच के स्थान में डाला जाता है। इससे बच्चे को शौच बाहर निकल पाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती क्योंकि कैप्सूल की वजह से उनके शौच का स्थान नरम और चिकना हो जाता है। इस उपाय के लिए आपको डॉक्टर की सलाह लेना बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि यह उपाय एक निर्धारित उम्र के बाद ही किया जा सकता है। मेरे डॉक्टर ने सलाह दी कि मैं अपनी बेटी के लिए केवल आधे कैप्सूल का उपयोग करूँ। एक बार डालने के बाद , शिशु कम से कम आधे घंटे में शौच कर लेता है।

क्योंकि इस्तेमाल के समय आपको इसका नुकीला हिस्सा अंदर डालना होता है, इसलिए थोड़ी सावधानी बरतनी होती है। हालांकि, कोई खतरा नहीं होता, पर अगर यह भाग टूटा हुआ है, तो बच्चे को अंदर ले जाने के लिए तकलीफ हो सकती है। अगर आपको कोई भी दुविधा हो, तो किसी चिकित्सक की मदद लें।

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अपने बच्चे को एक रिहाइड्रेट रखें

जब बच्चे को कब्ज़ हो, तो उसे हाइड्रेटेड रखने के लिए जो भी ज़रूरी है वह सब करें। जब मेरे शिशु को कब्ज़ का सामना करना पड़ा था, तो मेरे डॉक्टर ने मुझे शिशु को नियमित रूप से ओ.आर.एस देने को कहा था। सबसे बढ़िया बात यह है कि यह बाजार में आसानी से उपलब्ध है। ओ.आर.एस के घोल ने उस समय बहुत मदद की थी। परन्तु अपने बच्चे को ओ.आर.एस देने से पहले डॉक्टर से परामर्श ज़रूर कर लें।

क्या आपके बच्चे को भी कब्ज़ रहती थी? ऐसे में, आपने कब्ज़ सुधारने के लिए क्या उपाय किए थे? अपने सुझाव हमसे ज़रूर बांटे। अगर कब्ज़ से जुड़ी कोई भी जानकारी आपके पास हो या आपका कोई भी प्रश्न हो, तो हमें ज़रूर बताएं।