अगर शिशु और पालतू जानवर एक ही जगह हो तो रखें इन बातों का ध्यान

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यदि आपके पास भी एक पालतू जानवर (विशेषकर कुत्ता) है, तो आप जानते ही होंगे कि वह किस प्रकार से घर के नए सदस्य (आपके नवजात शिशु) का स्वागत करता है। केवल मालिक ही महसूस कर सकते हैं कि उनके पालतू जानवर के लिए परिवार के उस सदस्य को स्वीकार करना कितना मुश्किल हुआ होगा। इस बात में कोई आशंका नहीं है कि माता-पिता और पालतू जानवर दोनों के लिए ही घर में आए नए बच्चे की उपस्थिति को स्वीकार करना कठिन है। विषय पर विस्तार से चर्चा करें, तो हम समझ पाएंगे कि शिशु और पालतू जानवर दोनो एक ही जगह हो, तो उसके अपने ही फायदे और नुकसान होते हैं। परन्तु, फिर भी आपको ऐसे हालत में कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है।

1अपने पालतू जानवर का अपने नवजात शिशु से परिचय करवाएं

मनुष्यों की तरह जानवर, विशेषकर कुत्ता, अपने घर के सदस्यों के बारे में बहुत सुरक्षात्मक होता है। पालतू जानवर, परिवार में आए नए सस्दय को आसनी से स्वीकार नहीं करते। इसलिए, किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए, सुनिश्चित करें कि पहला परिचय करवाते समय पालतू जानवर आपके शिशु से एक सुरक्षित दूरी पर हो। अपनी निगरानी में पालतू जानवर को सूंघने दें। आप थोड़े धीरज से काम ले और अपने पालतू जानवर को इस नए सदस्य को पहचाने के लिए पूरा समय दें।

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2सुनिश्चित करें कि बच्चे और आपके पालतू जानवर के उत्पाद हमेशा एक दूसरे से दूर हों

जब स्वच्छता की बात आती है, तो मेरे लिए उससे महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। क्योंकि मेरे खुद के घर में शिशु और पालतू कुत्ता दोनों है, तो मैं हमेशा यह सुनिश्चित करती हूँ कि जब मेरे शिशु के वॉकर में खेलने का समय होता है, तो मेरे कुत्ते का भोजन या फिर उसके खिलौने फर्श पर बिल्कुल न हो। शिशु हर उस चीज़ को मुंह में डाल लेते हैं, जो उनके हाथ आसानी से आ जाती है। इसलिए अपने शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए आपको ध्यान रखना है कि आपका बच्चा कभी भी पालतू जानवर की चीज़ों को हाथ न लगाए या मुहं में न डाले।

3पालतू जानवर की क्षेत्र सीमाओं को स्थापित करना न भूलें

यदि आपके घर में भी पालतू जानवर है, तो आप जानते हैं कि पालतू जानवरों के साथ सीमाएं स्थापित करना कितना महत्वपूर्ण होता है, अन्यथा वह सभी जगह पर घूमते रहते हैं। जब बात शिशु की आती है, तो सीमाएं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। आपको अपने पालतू जानवर को उसकी सीमाओं से अवगत करवाना बहुत ज़रूरी है।

मैंने तो विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया कि मेरा पालतू कुत्ता कभी भी मेरी बेटी के पालने या हमारे बिस्तर के नज़दीक न आए। ऐसा करने के दो प्रमुख कारण थे, पहला तो यह कि मैं स्वच्छता के बारे में अधिक सतर्क थी, दूसरा यह कि शुरुआती दौर में मैं हमेशा चाहती थी कि मेरा कुत्ता मेरी बेटी से उचित दुरी पर रहें।

इसके इलावा यह मान लेने में भी ही भलाई है कि जानवर हमेशा जानवर ही होते है। आप चाहे उनको कितना भी प्यार दो, फिर भी उनमे से जानवरों की प्रवृत्तियां नहीं जाती। अतः, सुनिश्चित करें कि आपका पालतू उसकी सीमाएं जानता हो।

4अपने पालतू जानवरों को भी समान ध्यान दें

मुझे पता है कि बच्चा आने के बाद किसी और चीज़ पर ध्यान देना बहुत कठिन हो जाता है। लेकिन पालतू जानवर भी आपसे उतने ही ध्यान की मांग करते हैं, जितना कोई और। यह विशेष रूप से सच है कि जब उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो वह परेशान और उग्र हो जाते हैं। इसके साथ ही अगर शिशु आने से पहले आप के पास पालतू जानवर था, तो उसको अनदेखा करना पालतू जानवर के लिए और भी ज़्यादा परेशान करने वाला होता है।

बच्चे के आगमन का मतलब यह नहीं है कि आप पालतू जानवर को दिए जाने वाले ध्यान की जरूरतों को अनदेखा कर दें। इसलिए बच्चे के आगमन से पहले, आप जितना समय अपने पालतू जानवर को देते थे, उतना ही बच्चे के आने के बाद दें और उसमे कटौती न करें।

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5आपके बच्चे की सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता होती है

चाहे जो भी हो, आपके बच्चे की सुरक्षा हमेशा आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। शिशु के आने के बाद, कई बार मुझे भी अपने कुत्ते को कुछ दिनों के लिए किसी और के घर पर भेजना पड़ता था। खासकर, जब मेरा कुत्ता बीमार हो जाता था या जब मुझे अपने कुछ ही हफ़्तों के शिशु और कुत्ते के साथ घर पर अकेले रहना होता था।

आपका ऐसा करना आपको स्वार्थी बनाता है, यह सोचना बिल्कुल गलत है। आपके लिए बच्चे की सुरक्षा हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए। ऐसे पालतू प्रेमी जिनके पास अभी तक कोई बच्चा नहीं है, वह शायद मेरे इस विचार के खिलाफ हों, लेकिन ज़रा सोचिए कि अगर शिशु और पालतू जानवर एक ही जगह हो, तो इन बातों का ध्यान रखा जाना ज़रूरी है या नहीं?

हमसे अपने विचार ज़रूर बांटे। हमें बताइये आपने इस समस्या का कैसे हल किया था? अपने शिशु की सुरक्षा के लिए आपने कौन से ठोस कदम उठाए थे?

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