शिशुओं के लिए टीकाकरण अनुसूची

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Vaccination Schedule For Babies
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Simranjit Kaur

Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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टीकाकरण बच्चे को उसके शरीर में वो सब एंटीबॉडी उत्पादन करने में सहायता करता है जिससे उसका शरीर उसे अन्य रोगों से लड़ने में सक्षम बनाता है।

मेडिकल भाषा में, टीकाकरण एक जैविक तैयारी है जिस प्रक्रिया में आपके शिशु के शरीर में एंटीबॉडी के उत्पादन को उत्तेजित करके उसके शरीर को विभिन्न रोगों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रदान की जाती। ज़्यादातर यह प्रक्रिया इंजेक्शन द्वारा की जाती है, परंतु, इसके इलावा कई अन्य विकल्पिक तरीके भी हैं जैसे नाक के द्वारा स्प्रे इत्यादि। आपके बच्चे का टीकाकरण उसके जीवन के पहले वर्ष से शुरू हो जाता है और फिर 10 से 12 साल की आयु तक जारी रहता है। इसमें कुछ अनिवार्य और कुछ वैकल्पिक (optional) टीके शामिल हैं। शिशुओं के लिए टीकाकरण अनुसूची यहाँ नीचे दी गई है। अपनी सुविधा के लिए आप इसका प्रिंट भी ले सकती हैं।

टीका सुरक्षा पहली खुराक दूसरी खुराक तीसरी खुराक चौथी खुराक पाँचवी खुराक
1 BCG टीबी और ब्लैडर कैंसर जन्म के समय
2 HepB हेपेटाइटिस बी जन्म के समय पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 8 हफ्ते बाद
3 Poliovirus पोलियो जन्म के समय पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 4 हफ्ते बाद
4 DTP डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस जन्म से 6 हफ्ते के अंदर पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 4 हफ्ते बाद तीसरी खुराक से 6 महीने के बाद चौथी खुराक के 3 साल बाद
5 Hib बैक्टीरिया की वजह से होने वाले संक्रमण जन्म से 6 हफ्ते के अंदर पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 4 हफ्ते बाद तीसरी खुराक से 6 महीने के बाद
6 PCV निमोनिया जन्म से 6 हफ्ते के अंदर पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 4 हफ्ते बाद तीसरी खुराक से 6 महीने के बाद
7 RV गंभीर अतिसार रोग जन्म से 6 हफ्ते के अंदर पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 4 हफ्ते बाद
8 Typhoid टाइफाइड बुखार, अतिसार जन्म से 9 महीने के अंदर पहली खुराक से 15 महीने बाद
9 MMR खसरा, कण्ठमाला, रूबेला जन्म से 9 महीने के अंदर पहली खुराक से 6 महीने बाद
10 Varicella चेचक जन्म से 1 साल के अंदर पहली खुराक से 3 महीने बाद
11 HepA जिगर की बीमारी जन्म से 1 साल के अंदर पहली खुराक से 6 महीने बाद
12 Tdap डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस जन्म से 7 साल के अंदर
13 HPV एचपीवी से होने वाले कैंसर जन्म से 9 साल के अंदर 9 से 14 साल के बच्चों के लिए – पहली खुराक से 6 महीने बाद
15 साल या उससे बड़े बच्चों के लिए – पहली खुराक से 1 महीने बाद
15 साल या उससे बड़े बच्चों के लिए – दूसरी खुराक से 5 महीने बाद

*उपरोक्त किसी भी जानकारी का पालन करने से पहले, एक बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श कर लेना बहुत जरूरी है।

यदि आप टीकाकरण सूची के मुताबिक अपने शिशु को कोई महत्वपूर्ण खुराक दिलवाना भूल गई हों तो नीचे दी गई टीका अनुसूची के आधार पर आप वही खुराक दुबारा भी दिलवा सकती हैं

टीका सुरक्षा पहली खुराक दूसरी खुराक तीसरी खुराक चौथी खुराक पाँचवी खुराक
1 BCG टीबी और ब्लैडर कैंसर पाँच साल तक कभी भी ली जा सकती है
2 HepB हेपेटाइटिस बी अगर जन्म के समय इसे भूल गये हो तो जितना जल्दी हो सके खुराक ले लो पहली खुराक के 1 महीना बाद दूसरी खुराक से 5 महीने बाद
3 Poliovirus पोलियो जन्म के पहले महीने पहली खुराक के 1 महीना बाद दूसरी खुराक से 6 महीने बाद
4 DTP डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस कभी भी ली जा सकती है पहली खुराक के 1 महीना बाद दूसरी खुराक से 5 महीने बाद
5 Hib बैक्टीरिया की वजह से होने वाले संक्रमण पाँच साल तक कभी भी ली जा सकती है पहली खुराक के 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 6 महीने बाद तीसरी खुराक से 6 महीने बाद चौथी खुराक से 6 महीने बाद
6 PCV निमोनिया दो से पाँच साल तक कभी भी ली जा सकती है
7 RV गंभीर अतिसार रोग पहले छह महीनों के भीतर ली जा सकती है पहली खुराक के 4 हफ्ते बाद दूसरी खुराक से 4 हफ्ते बाद
8 Typhoid टाइफाइड बुखार, अतिसार कभी भी ली जा सकती है
9 MMR खसरा, कण्ठमाला, रूबेला स्कूल जाने वाले बच्चो की उम्र तक कभी भी ली जा सकती है पहली खुराक के 4 हफ्ते बाद
10 Varicella चेचक कभी भी ली जा सकती है 7 से 12 साल के बच्चों के लिए – पहली खुराक से 3 महीने बाद
13 से 18 साल के बच्चों के लिए – पहली खुराक से 4 हफ्ते बाद
11 HepA जिगर की बीमारी कभी भी ली जा सकती है पहली खुराक के 6 महीना बाद
12 Tdap डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस 7 से 10 साल के बच्चों के लिए – पहली खुराक
11-18 साल के बच्चों के लिए सिर्फ़ एक खुराक
7 से 10 साल के बच्चों के लिए – पहली खुराक से 1 महीने बाद 7 से 10 साल के बच्चों के लिए – दूसरी खुराक से 5 महीने बाद

*उपरोक्त किसी भी जानकारी का पालन करने से पहले, एक बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श कर लेना बहुत जरूरी है।

आइए अब हम उन बीमारियों के बारे में थोड़ी जानकारी ले लेते है जिनसे ये टीके आपके शिशु की रक्षा करते हैं।

डिप्थीरिया: डिप्थीरिया एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, सामान्यतया यह नाक और गले की श्लेष्मा झिल्लियों को प्रभावित करता है जिससे साँस लेने की प्रक्रिया मे कठिनाई होती है और कई बार उसे रोक भी देती है। डीटीपी टीकाकरण इस बीमारी का समाधान है।

खसरा: खसरा एक गंभीर बीमारी है। इसमे बहुत तेज़ बुखार और अन्य कई जटिलताएँ जैसे आंख और कान का संक्रमण, बहरापन, सांस की नली की सूजन, निमोनिया के संक्रमण इत्यादि होने की बहुत प्रबल आशंकाएँ होती है। खसरा मस्तिष्क में कुछ दुर्लभ जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। इस बीमारी को भी टीकाकरण से रोका जा सकता है।

काली खांसी: यह एक खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण है। क्योंकि इस खाँसी मे रोगी के मुँह से `हुप-हुप` की आवाज़ निकलने लगती है, इसी वजह से इसको हूपिंग कफ`भी कहा जाता है। काली खांसी की जटिलताओं में आक्षेप यानि कि मिरगी का दौरा (convulsions), निमोनिया, कान में संक्रमण, हर्निया और कभी-कभी मस्तिष्क संबंधी रोग भी शामिल हैं इन सब का एक ही समाधान है – डीटीपी टीकाकरण।

टेटनस: टेटनस एक संक्रामक रोग है जिससे मृत्यु तक हो सकती है। यह तब होता है जब शारीरिक घाव टेटनस बीजाणुओं से युक्त मिट्टी के संपर्क मे आकर दूषित जाता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानि कि Central Nervous System (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) को प्रभावित करता है। इसलिए इस रोग से सुरक्षा के लिए टीके की समय पर उचित खुराक सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है।

पोलियो: पोलियो एक वायरल बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र Central Nervous System को प्रभावित करती है। यह अंगों के पक्षाघात यानि कि paralysis का कारण भी बन सकता है, और कभी-कभी व्यापक पक्षाघात (extensive paralysis), जिसमें श्वसन की मांसपेशियों, मेनिन्जाइटिस यानि कि दिमागी बुखार और मौत भी शामिल है। इस रोग के खिलाफ संरक्षण आवश्यक है।

उपर दिए गये टीके आपके शिशु को इन सब ख़तरनाक संक्रमणों और लाइलाज बीमारियों से बचाते है इस लिए इनके संबंध में किसी किस्म की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए

इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहूँगी कि उपरोक्त किसी भी जानकारी का पालन करने से पहले, एक बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श कर लेना बहुत जरूरी है। आख़िर यह आपके शिशु की सुरक्षा का मामला है।

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Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.