क्या आपका बच्चा भी खाने-पीने में नखरे करता है?

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क्या आपका बच्चा भी खाने-पीने में नखरे करता है? एक ऐसा बच्चा, जो खाने-पीने को लेकर बहुत नखरे करता हो, उसे कुछ भी खिला पाना एक चुनौती से कम नहीं है, खासकर जब बात शिशु की हो।

एक माँ होने के नाते आपने बहुत बार ऐसा अनुभव किया होगा कि जब आप शिशु को मिश्रित आहार देना शुरू करती हैं, तो शुरुआत में शिशु हर आहार में पूरी रूचि दिखाता है। अब इसे शिशु की नए आहार के लिए जिज्ञासा कहें या कुछ और, उसे आप जो भी खाने को देती हैं, वह बड़े शौंक से उसे खाने लगता है और नए आहार को स्वीकार करने में कोई आपत्ति भी नहीं दिखाता। पर जैसे-जैसे आपके शिशु का आहारों के लिए स्वाद विकसित होना शुरू होता है, उसकी खाने के आदतें और पसंद-नापसंद बदलने लगती है और वह खाने-पीने में नखरे करने लगते हैं। क्या आपका बच्चा भी खाने-पीने में नखरे करता है? अगर हाँ तो हमारा यह लेख आपकी सबसे बड़ी परेशानी को चुटकियों में दूर कर सकता है।

शुरू में मेरी बेटी ने भी हर नए आहार को खाने में बड़ी दिलचस्पी दिखाई थी। परन्तु, अब उनमें से बहुत से ऐसे आहार है, जिनकी तरफ वह देखना भी पसंद नहीं करती। आहार को लेकर उसका ऐसा व्यवहार कई बार मुझे चिंता में डाल देता था। मैं यहीं सोचती रहती थी कि उसके लिए ऐसा क्या बनाऊं जो उसे पसंद आए और वह बिना आनाकानी के उसे खा ले। जब मुझे लगने लगा कि मेरी बेटी भी खाने-पीने के मामले में नखरे करने लगी है, तो उसकी इस आदत को बदलने के लिए मैंने कुछ तरीके इस्तेमाल किए। आप भी इनका इस्तेमाल करके, अपने बच्चे को वह सब आहार खिला सकती है, जिनको खाने में आपका बच्चा नखरे करता है।

ज़रुरु पढ़े – शिशु की शारीरिक विकास में वृद्धि सम्बन्धी समस्याओं से कैसे निपटे

1. शिशु को सभी विकर्षणों से दूर रखें 

अगर आपको लगता है कि जब भी आप अपने शिशु को कुछ खिलाने का प्रयास करती है, वह खाने पर ध्यान ही केंद्रित नहीं करता, तो हो सकता है कि आपका बच्चा उसके किसी नए खिलौने को ढूंढ रहा है। ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि जब तक उसे वह खिलौना नहीं मिलेगा वह खाने में रूचि नहीं दिखाएगा। इसलिए जब भी आप बच्चे को कुछ खिला पीला रहीं हो, तो ध्यान रखें कि वह सभी विकर्षणों से दूर हो।

2. शिशु के विकास की वृद्धि दर पर निरंतर नज़र रखें

अगर आपने शिशु के शारीरिक विकास में वृद्धि दर पर लिखा हमारा लेख नहीं पढ़ा है, तो ज़रूर पढ़ें। विकास दर को लेकर हर शिशु की प्रतिक्रिया अलग होती है। ऐसे में कुछ ज़्यादा भूख लगने के संकेत देते हैं, और कुछ सिर्फ फार्मूला दूध या स्तनपान में ही संतुष्टि दिखाते हैं। कहने का मतलब यह है कि अगर आपका बच्चा भी इसी दौर से गुज़र रहा हो, तो जब तक वह इस विकास की वृद्धि के चरणों से गुज़र नहीं जाता, आपको किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। थोड़ी प्रतीक्षा करें क्योंकि इस चरण के गुज़रने के बाद ही आप जान पाएंगी कि क्या आपका शिशु सच में खाने को लेकर नखरे करता है या उसका खाने-पीने को लेकर यह बदलाव विकास की वृद्धि के चरणों की वजह से है।

3. आहारों का स्वाद विकसित करने के लिए उसे ज़रूरी समय अवश्य दें

मुझे याद है कि मेरी भतीजी ने भी शुरुआत में आहार-विविधीकरण को स्वीकार नहीं किया था। उसे जो भी नया आहार दिया जाता था, वह उसे खाने से मना करती थी। क्योंकि आहार-विविधीकरण से पहले उसे सिर्फ दूध ही दिया था, तो शुरुआत में उसकी माँ उसे जो भी देती थी, मेरी भतीजी उसे गटक जाती थी।

पर कुछ समय के बाद हमने महसूस किया कि उसे स्तन के दूध से लेकर अर्द्ध ठोस खाद्य पदार्थों तक खुद को ढालने में काफी कठिनाई हुई थी। इसका एक प्रमुख कारण अन्य आहारों के लिए स्वाद का बनना था। इलसिए अपने बच्चे को दिए जाने वाले नए आहारों का स्वाद विकसित करने के लिए उसे ज़रूरी समय अवश्य दें और एकदम से किसी नतीजे पर न पहुंचे।

4. बच्चे के आहार में उपलब्ध सभी विकल्पों को प्रयोग में लाएं

जिस प्रकार हम अपने रोज़ के भोजन में बदलाव चाहते है, वैसे ही शिशु भी एक ही चीज़ बार-बार खाने से ऊब जाते है। इसके साथ ही, अगर आप एक ही चीज़ अपने शिशु को बार-बार देते जाएंगे, तो वह अन्य चीज़ों के लिए स्वाद विकसित कर ही नहीं पाएगा। ऐसा न हो, इसलिए अपने बच्चे के आहार में उपलब्ध सभी विकल्पों को प्रयोग में लाएं। अगर आपने सुबह उसे सेरेलक जैसा कुछ दिया हो, तो दोपहर को मसले हुए केले में ओट पाउडर मिला के दे और शाम के खाने में खिचड़ी बना दे। इसके साथ ही दिन के दौरान उसे उबली हुई सब्ज़ियाँ देना न भूलें।

5. शिशु को अपनी निगरानी में खुद से खाने दें

कभी-कभी शिशु अपने हाथों से खाने का प्रयास करते हैं, तो ऐसे में अगर संभव हो, तो उनको खुद से खाने दें। जब हम उनको ऐसा करने से रोकते है (क्योंकि हम खुद उनको खिलाना चाहते हैं), तो शिशु निराश हो जाते हैं। इसलिए, अगर आपका शिशु खुद से खाना चाहता है, तो उसे अपनी निगरानी में खाने दें। यह उसके खाने-पीने के स्वभाव में परिवर्तन ला सकता है।

इस लेख को लिखना शुरू करने से पहले, मैं अपनी बेटी को एक नाशपाती खिलाने की कोशिश कर रही थी और वह उसे खाने में नखरे कर रही थी (यहां तक कि मसले हुए रूप में भी)। इसलिए मैंने उसे एक पूरा टुकड़ा सौंप दिया और देखा कि वह बड़ी ही उत्सुकता के साथ इसे चखने लगी और आनंद लेने लगी।

ज़रुरु पढ़े – आहार विविधीकरण – जानिये बच्चे की आहार में विविधता कैसे लाएं

इसलिए, हर बार जब आपका बच्चा आप के द्वारा दिए गए किसी आहार को स्वीकार नहीं करता, तो किसी अलग तकनीक का प्रयास करें। याद रखें कि हर बार शिशु खाने में नखरे नहीं करते, कभी-कभी वह अपने भोजन के साथ प्रयोग करना चाहते हैं, जो हमें उन्हें करने देने चाहिए।

क्या आपने भी ऐसी मुश्किल का सामना किया है? क्या आपका बच्चा भी खाने-पीने में नखरे करता था? उसकी इस आदत को बदलने के लिए आपने कौन सी तरकीब अपनाई थी। अपनी तकनीक के बारे में हमें और हमारे अन्य पड़ने वालों को ज़रूर बताएं।

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