हमारा बच्चा दिन भर ठीक रहता है लेकिन रात को नींद से उठकर बहुत रोता है गैस की दवाई ,ग्राइप वाटर सभी कुछ हम उसे दे रहे है । कुछ दिनों से उसे लूज़ मोशन्स लगे हुए है कृपया समाधान बताये ।
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बच्चों के रात को रोने के या उसे दस्त लगने के कई कारण हो सकते हैं। आइए, पहले हम उसे दस्त लगने के कारणों को समझते हैं।
दस्त लगने के कारण
शिशु के आहार में बदलाव
अगर आपने हाल ही में उसके आहार में कोई परिवर्तन किया हो, जैसे कि उसका फार्मूला मिल्क ब्रांड बदला हो या फिर उसे कुछ ठोस या अर्ध-ठोस आहार देना शरू किया हो, तो इस बदलाव की वजह से आप उससे इस प्रतिक्रिया की उम्मीद कर सकते हैं। ऐसे में, शिशु नए आहार के प्रति अनुकूलता दिखाने में समय लेता है। कई बार उसका शरीर और पाचन शक्ति बदले हुए आहार को स्वीकार नहीं करती।
दांत निकलना
दस्त लगने का एक कारण दांत निकलना भी हो सकता है। दांत निकलने पर बच्चे अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते हैं।
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कुछ बच्चों को खांसी आने लगती है, कुछ बच्चों को कब्ज़ होने लगी है और कुछ बच्चों को दस्त हो जाते हैं। इसके लिए आपको दाँत निकलने से पहले के लक्षणों को अच्छे से समझना चाहिए।
मौसम में बदलाव
मौसम में बदलाव की वजह से बच्चे को गर्मी लगना और शरीर के अंदर गर्मी होना भी दस्त लगने का एक कारण हो सकता है। इस बात की पुष्टि के लिए, डॉक्टर से मिल लें।
बच्चे के रात को रोने के कारण
बच्चे के रात को रोने के कई कारण हो सकते हैं, जो कि शिशु की उम्र पर भी निर्भर करते हैं। इनमें से कुछ कारण निम्नलिखित है –
मौसम में बदलाव
मौसम में बदलाव की वजह से बच्चे का गर्मी महसूस करना। क्योंकि गर्मियां शुरू हो गई है, तो ध्यान रखें कि जिस कमरे में आपका शिशु सो रहा है, उस कमरे का तापमान सही हो अर्थात ज्यादा गर्म न हो।
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कई बार बच्चा बिस्तर गीला न करें, इसलिए हम उसके नीचे एक रबड़ की एक शीट बिछा देते हैं, इससे भी उसे गर्मी महसूस होती है। ऐसे में, आप उसे डायपर पहना कर और उस शीट को वह से हटा कर भी सुला सकते हैं।
पेट में कीड़े
पेट में कीड़े होना भी एक कारण हो सकता है। ऐसे मामलों में, बच्चा रात को एक ही समय पर रोजाना रोता या खांसता है। पेट में कीड़े होने के कई कारण हो सकते हैं। इस विषय में आप हमारा लेख – भी पढ़ सकते हैं।
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मेरी बेटी को भी यही समस्या होती थी। कभी-कभी वह रात को 11 बजे से लेकर 2 बजे तक बहुत रोती और खांसती थी। शुरू में मैं इसका कारण नहीं समझ पाती थी। घर के बड़े लोग मुझे कहते थी कि शायद नज़र लगी गई है और वह नज़र उतारने लगते थे।
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लेकिन, फिर मेरे बाल रोग विशेषज्ञ ने मुझे बताया था कि क्योंकि मेरी बेटी खुद से चल-भाग सकती थी, और ज़्यादातर वह नंगे पाँव ही जमीन पर भागती थी। इसी वजह से उसे पेट के कीड़ों जैसी समस्या हो जाती थी। मेरे डॉक्टर ने मुझे कीड़ों से सम्बंधित एक दवा देने को कहा था। अब हर 6 महीने में एक बार उसे मैं यह दवाई देती हूँ, और वह ठीक रहती है।
कान में इन्फेक्शन
बाच्चे के रोने के पीछे एक कारण कान में इन्फेक्शन भी हो सकता है। 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों के कान में इन्फेक्शन होने की संभावनाएं अधिक होती है। अब अगर आपका शिशु भी उम्र के इसी पड़ाव से गुज़र रहा है तो आपको अपने बाल रोग विशेषज्ञ से शिशु के कानों में इन्फेक्शन की पुष्टि करवा लेनी चाहिए।
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फूड एलर्जीस
बहुत से माता-पिता यह समझ ही नहीं पाते कि उनके बच्चे को किसी खास आहार से भी एलर्जी हो सकती और अक्सर शिकायत करते हैं कि जितनी बार भी वो अपने शिशु को वही खास चीज़ देते है, उनका शिशु अस्वस्थ हो जाता है।
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वास्तव में, जब भी हमारी रोग प्रतिकार शक्ति (इम्यून सिस्टम) किसी फूड मे पाए जाने वाले प्रोटीन के कारण नुकसानदेह तरीके से प्रभावित होती है और हमको अस्वस्थ करती है, तो उसे हम मेडिकल भाषा में फूड एलर्जी कह देते है।
इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर फूड एलर्जी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।
इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए, मैं आपको सलाह देती हूँ कि एक बार किसी डॉक्टर से सलाह ले लें। शिशुओं की समस्याओं को समझना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि वह बोल कर नहीं बता सकते।
मेरी बेटी भी कभी कभी रोत्ती है पर वो अक्सर भूखे पेट होने पर रोत्ती है क्योंकि वो अभी भी अपनी मम्मी का दूध लेती है जिस से उसका पेट जल्दी खाली हो जाता है