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अब क्योंकि आप बच्चे को जन्म दे चुकी हैं, तो अब आपके शिशु के जन्म के बाद आने वाले शारीरक परिवर्तनों के बारे में सोच कर चिंतित होना स्वाभाविक है। शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में आने वाले कुछ परिवर्तन तो सामान्य होते हैं, जबकि कुछ असमान्य भी होते हैं। आइए आज हम शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में आने वाले परिवर्तनों के बारे में बात करते हैं।

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1प्रसव के बाद संकुचन

शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में आने वाले परिवर्तनों की शुरुआत हम उन परिवर्तनों से करना चाहते हैं, जो जन्म के एकदम बाद सामने आते हैं। इन परिवर्तनों में एक है – प्रसव के बाद की पीड़ा। जन्म देने के बाद आपके गर्भाशय को अपनी प्रसव से पहले वाली स्थिति में लौटने के लिए कुछ समय लगता है। इसी कारणवश आपको अचानक दर्द उठते हैं और ऐसा अधिकतर उस वक़्त होता है जब आप स्तनपान करवा रहीं होती हैं। परन्तु, यह दर्द समय के साथ कम होने लगता है और ज़्यादा असहनीय नहीं रहता। लेकिन अगर यह कुछ समय के बाद भी कम न हो अर्थात आपको असहनीय दर्द का अनुभव हो, तो आपको स्त्री-रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क कर लेना चाहिए।

2योनि में सूजन

योनि में सूजन होना स्वाभाविक है क्योंकि बच्चे को गर्भ से बाहर निकालने में एक स्त्री को बहुत मेहनत करनी पड़ती है और पीड़ा का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में सूजन का होना स्वाभाविक है। अब यदि आपके शिशु की डिलीवरी एपीसीओटमी अर्थात योनि में चीरा डाल कर की गई है, तो यह एक बिल्कुल अलग मामला है। लेकिन सामान्य प्रसव के बाद, आपको अपनी योनि में थोड़ी सी पीड़ा और दर्द का सामना करना ही पड़ता है। हालांकि, कुछ दिनों में यह दर्द कम हो जाएगा और आप अपने सामान्य दिनचर्या में वापस लौट पाएंगे।

वहीं दूसरी तरफ अगर एपीसीओटमी का मामला है, तो टांके आपके शौच या पेशाब के समय तकलीफ देंगे। इस पीड़ा से निकलने के लिए आपको 5-7 दिनों तक समय लगता है। इस वक़्त आप यही सोचती रहती हैं कि कहीं आपके शौच या पेशाब करने से टांके खुल न जाएँ। परन्तु, घबराने की ज़रूरत नहीं है और यह एकदम सामान्य है।

3बालों का झड़ना

मानो या न मानो, बच्चे के जन्म के बाद आपको इस समस्या से भी गुज़रना पड़ता है अर्थात आपके बाल झड़ने लगते हैं। ऐसा नहीं है कि आपके सारे बाल झाड़ जाएंगे , परन्तु फिर भी पहले की तुलना में शिशु के जन्म के बाद आपके बाल ज़्यादा झड़ने लगते हैं। गर्भावस्था में, एस्ट्रोजेन स्तरों में वृद्धि के कारण बाल नहीं झड़ते। शिशु के जन्म के बाद जब एस्ट्रोजेन स्तरों को नीचे लाया जाता है, तब आपके बाल पुनः झड़ने लगते हैं। लेकिन कुछ महीनों के भीतर ही अपने बालों के गिरने और उनके विकास के चक्रों के सामान्य होने की उम्मीद कर सकती हैं।

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4मूड का बदलना

मेरी राय में, शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में आने वाले परिवर्तनों में से यह सबसे अधिक तकलीफदेह होता है क्योंकि यह वास्तव में आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकता है। एक मिनट में आप अपने बच्चे को आखिर में अपने बाहों में होने के विचार की ख़ुशी महसूस कर रहे होते हैं, और अगले ही क्षण आप यह सोचकर रो रहे होते हैं कि जब वह पेट में था, उस वक़्त आप ज़्यादा अच्छा महसूस कर रही थी। मैं मानती हूँ कि यह बहुत ही अजीब है, परन्तु ऐसा होता है। प्रसव के बाद, मूड का यकायक बदलना बहुत ही आम सा परिवर्तन है।

5सेक्स के लिए इच्छा में कमी आना

यह भी शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में आने वाले परिवर्तनों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परिवर्तन है। बहुत सी महिलाएं शिशु के जन्म के बाद खुद की सेक्स ड्राइव में एक हैरानजनक गिरावट महसूस करती है। ऐसा होना भी स्वाभाविक है क्योंकि शिशु के जन्म के बाद आपकी बच्चे को लेकर व्यस्तता बढ़ जाती है और आप भूल ही जाती हैं कि परिवार में अन्य लोग भी हैं जैसे कि आपके पति। कुछ महिलाओं के लिए सेक्स के लिए खुद को मानसिक रूप से पुनः तैयार करने के लिए एक साल तक का समय भी लग जाता है। हालांकि डॉक्टर सामान्यतः आपको गर्भधारण के 6-7 सप्ताह के बाद सेक्स करने की अनुमति दे देते हैं।

6शिशु के जन्म के बाद माँ को होने वाला डिप्रेशन

यह सच है कि शिशु को जन्म देने वाली हर माँ इस डिप्रेशन की समस्या से नहीं गुज़रती। लेकिन फिर भी अगर आपको लगता है कि आप इस समस्या से गुज़र रही हैं , तो आपको तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। प्रसव के बाद डिप्रेशन बहुत ही सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन फिर भी यह आपके चिकित्सक के ज्ञान में होना चाहिए ताकि वह आपको इससे बाहर लाने के लिए आवश्यक दवाएं दे सके।

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प्रसव के बाद आपका अनुभव कैसा रहा? क्या आपका अनुभव ऊपर दिए अनुभवों से अलग था? क्या आपके पास कोई ऐसी सलाह है, जिनसे गर्भवती महिलाओं की इस विषय में कोई मदद हो सके? हमारे पाठकों से ज़रूर बांटें।

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