
बच्चे के दिमाग़ मे किस समय क्या चल रहा होता है, यह सिर्फ़ बच्चा ही जान सकता है। माता-पिता चाहे कितने ही तज़ुर्बेकार क्यों ना हो, बच्चे के रोने की वजह समझ पाना कभी कभी उनके लिए भी बहुत मुश्किल हो जाती है। और, उससे भी बुरी बात यह होती है कि बच्चे खुद भी अपनी तकलीफ़ को बयान करने में असमर्थ होते है। रोने के सिवाए उनके पास कोई और चारा नहीं होता जिससे वो माँ-बाप को बता सके कि वो तकलीफ़ में हैं।
उनका रोना ही एक इशारा है कि या तो वो किसी दर्द / तकलीफ़ में हैं, या अपने इर्द-गिर्द सिर्फ़ आपकी उपस्थिति चाहते है। आप यकीन नही मानेंगे कि बच्चे भी “अटेन्षन सीकर” यानि कि उन लोगों की तरह व्यवहार करने लगते है जो हर समय दूसरे के ध्यान को अपनी तरफ केंद्रित रखना चाहते है। फिर भी माता-पिता में यह जानने की व्याकुलता बनी रहती कि आख़िर मेरा बच्चा रो क्यो रहा है? आइए जानते है कुछ ऐसे ही कारणों के बारे में।
1शिशु को किसी किस्म का दर्द या तकलीफ़ है
नवजात शिशुओं मे आमतौर पर दर्द की वजह के प्रमुख कारण पेट का दर्द या पेट की गैस की समस्या होती है। ज़रा याद करें कि क्या आपने अपने बच्चे को दूध पिलाने के बाद डकार दिलवाया था या नही? अगर आप भूल भी गयी हैं तो कोई बात नहीं, आप अब भी अपने बच्चे को सीधा उठा के अपने कंधे से लगाकर उसको डकार दिलवा सकती है।
अगर दूध पिलाए हुए कुछ समय बीत चुका है तो, बच्चे को पेट के बल उल्टा भी लिटा सकती है, इससे बच्चे को आराम मिलेगा क्योंकि पेट पर भार आने की वजह से उसको गैस निकालने में और डकार लेने मे मदद मिलेगी। इसके इलावा दाँत आने का वक़्त अगर नज़दीक है तो भी आपका बच्चा जरूरत से ज़्यादा रोएगा। ऐसे में दाँतों के आने के पहले के लक्षणों को अच्छी तरह समझ ले ताकि आप जान सके कि कहीं बच्चा दाँतों के आने की वजह से तो नहीं रो रहा।
2बच्चा गीला है
क्योंकि बच्चे सारा दिन कुछ ना कुछ खाते पीते रहते है और शौच और पेशाब करते रहते है, जिस वजह से वो बार बार गीला करते है। वैसे तो उनका बार बार शौच और पेशाब करना अच्छी बात है क्योंकि इससे पता चलता है कि उनकी पाचन क्रिया ठीक है।
पर फिर भी जब उनका डाइपर शौच या पेशाब की वजह से गीला होगा तो वो रोने लगेंगे। चाहे आपने कुछ समय पहले ही उसका डाइपर बदला हो, क्योंकि आपका बच्चा रो रहा है तो एक बार फिर से जाँच ले कि कहीं आपके बच्चे का डाइपर गंदा तो नहीं है।
3आपके शिशु को बुखार है
इस बात मे कोई दो राय नहीं है कि बच्चों को बहुत ही जल्दी सर्दी जुखाम पकड़ लेता है। अपने बच्चे का तापमान जाँचे कि कहीं वो बीमार तो नहीं है? क्या पता उसको डॉक्टर की ज़रूरत है।
जब सवाल बच्चे के स्वस्थ का हो तो आपको यकीनी तौर पर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके अपने शिशु विशेषज्ञ को संपर्क करना चाहिए।
4बच्चे को गर्मी या सर्दी लगना
आपने अपने ग़लत अनुमान की वजह से कि बच्चे को ठंड लग रही है, बच्चे को 7-8 जोड़ी कपड़े पहना दिए है। पर असल में आपके बच्चे को खुली हवा चाहिए और ज़्यादा कपड़ों में उसको घुटन महसूस हो रही है।
आप इसी विचार से उसके कपड़े उतारने लगती है कि उसको कम कपड़ों में आराम मिलेगा। पर आप देखती हैं कि बच्चे को फिर भी आराम नहीं आया और वो अभी भी रो रहा है। क्या आप जानती है कि यहाँ पर आपसे फिर से एक ग़लती हो गई है?
आपने उसके शायद सारे कपड़े उतार दिए और अब बच्चे को ठंड लग रही है। तो इस बात का भी ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी है कि कितने कपड़े उतारने हैं और कितने पहनाने हैं।
5शिशु थक चुका है
शिशु बहुत जल्दी थक जाते है। सारा दिन कुछ ना करके एक ही जगह लेटे हुए भी वो थकान महसूस करते है। ऐसे हालात में भी वो रोने लगते है। अगर आपको लगता है की बच्चा थक गया है तो उसे एक बेहतरीन मालिश दें। इससे उसको ना सिर्फ़ थकान से राहत मिलेगी बल्कि उसको अच्छी नींद भी आ जाएगी।
6शिशु भूखा है
शिशु के रोने का एक कारण भूख भी हो सकती क्योंकि शिशु को हर 2 घंटे बाद दूध की जरूरत महसूस होती है। इसको समझना कोई रॉकेट साइन्स नही है कि बच्चे को अपने तेज़ी से हो रहे विकास के लिए अधिक मात्रा में उर्जा की जरूरत होती है और वो उसे आहार से ही मिलती है। इसलिए ज़रा जाँच ले कि उसको आपने आख़िरी बार दूध कितने घंटे पहले दिया था।
7बच्चे को उसका पंसदीदा खिलौना चाहिए
कहीं आपका बच्चा अपना खिलौना तो नहीं माँग रहा? कहीं वो खिलौना उसका टीथर तो नही? खिलौना कोई सा भी हो, अपने बच्चे की इस जरूरत को समझ कर उसको उसका पसंदीदा खिलौना देकर चुप करवाने का प्रयास करे।
8आपका बच्चा आपका ध्यान चाहता है
जैसा की मैने पहले भी कहा कि आपका बच्चा सिर्फ़ आपका ध्यान अपनी ओर केंद्रित करने के लिए भी रोता हो सकता है। और कई बार तो वो सिर्फ़ इसलिए भी रोते है कि अपने इर्द-गिर्द सिर्फ़ आपकी उपस्थिति चाहते है। कई बार शिशु सिर्फ़ आपका आलिंगन चाहते है, वो चाहते है कि कोई उन्हे उठाए। उनको सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी माँ का दुलार और स्पर्श चाहिए होता है।
तो देखा आपने कि बच्चे के मन तो पढ़ना इतना भी मुश्किल काम नही है। बस जरूरत है तो अपने शिशुओं की भाषा को समझने की।
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