
विषाक्त भोजन अर्थात फूड पाइज़निंग वह स्थिति है जहां जीवाणु, रोगाणु या वायरस इत्यादि हमारे द्वारे खाए जाने वाले भोजन के माध्यम से हमारे शरीर पर हमला करते हैं। फूड पाइज़निंग एक बहुत ही आम समस्या है और हम में से बहुत से लोग अपने जीवन में कभी न कभी फूड पाइज़निंग का शिकार जरूर हुए होंगे। वयस्कों की तुलना में बच्चों में फूड पाइज़निंग के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करना बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। हम जानते हैं कि बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली वयस्कों के मुकाबले पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती, इसलिए बच्चों में फूड पाइज़निंग बहुत खतरनाक हो सकती है । कई बार बच्चों के मामलों में, फूड पाइज़निंग बिना किसी दवा के, समय के साथ खुद ही ठीक हो जाती है। लेकिन, फिर भी फूड पाइज़निंग के किसी भी संकेत के पाए जाने पर आपको किसी बाल रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
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फूड पाइज़निंग के संभावित कारण
वैसे तो, फूड पाइज़निंग के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन, प्रमुख रूप से स्वच्छता के मामले में की गई लापरवाही सबसे बढ़ा कारण है। आइए, अब हम फूड पाइज़निंग से सम्बंधित कुछ सामान्य कारणों के बारे में बात करते हैं।
1. बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को पकाए जाने या खाए जाने से पहले ठीक से धोया न जाना।
2. बिना हाथ धोए बच्चे को खाना खिलाना।
3. मांस, अंडे, डेयरी उत्पादों जैसी चीजों का सेवन फूड पाइज़निंग के रोगाणुओं के लिए एक खुला निमंत्रण होता है।
4. दूषित पानी का सेवन।
5. अनुचित तापमान में संग्रहीत भोजन का सेवन।
6. बच्चों की अविकसित या खराब प्रतिरक्षा प्रणाली।
7. बच्चे को दिए जाने वाले भोजन का कच्चा, आधा पक्का, या ठंडा होना – आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूंगी कि खाने से पहले भोजन को अच्छे से न पकाना या गर्म न करना, रोगाणुओं को निमंत्रण देने जैसे है और यही रोगाणु आगे चलकर फूड पाइज़निंग का कारण बन जाते हैं।
फूड पाइज़निंग के लक्षण
इससे पहले कि फूड पाइज़निंग के उपलब्ध इलाज के विकल्पों में से कोई सही विकल्प चुना जा सके, आपको फूड पाइज़निंग के लक्षणों को बारीकी से समझने की आवश्यकता है। जैसा आप जानते हैं कि हर बच्चा दूसरे से अलग होता है, इसीलिए फूड पाइज़निंग जैसा संक्रमण होने पर हर बच्चे से अलग प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा सकती है। ऐसा होना संभव है कि फूड पाइज़निंग के मामले में जो प्रतिक्रिया एक बच्चे में दिखे, वह दूसरे में न हो। कुछ बच्चों के मामलों में फूड पाइज़निंग से जुड़े सूक्ष्मजीव दो घंटों से भी कम समय में प्रतिक्रिया करते हैं, जबकि अन्य मामलों में इन संकेतों को उभरने में दो से अधिक दिन भी लग जाते हैं।
फूड पाइज़निंग में दो प्रकार के लक्षण नजर आते हैं – सामान्य और गंभीर।
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फूड पाइज़निंग के सामान्य लक्षण –
- बुखार
- मतली अर्थात नौसिया
- उल्टी
- दस्त
- पेट दर्द और ऐंठन
- शारीरिक कमजोरी
फूड पाइज़निंग के गंभीर लक्षण –
- बच्चे को कुछ भी देख पाने में परेशानी अर्थात नजर का धुंधला होना
- उनींदापन
- साँस लेने में दिक्क्त अर्थात श्वास विकार
- मुंह, टांगों या बाजुओं के चारों ओर के हिस्से का सन्न होना या झनझनाहट महसूस होना। अपने बच्चे में ऐसे किसी भी लक्षण को आपको बहुत बारीकी से देखना होगा क्योंकि आपका बच्चा अभी बहुत छोटा है और कुछ भी बताने में असमर्थ है। लेकिन, अगर आप देखते हैं कि आपका बच्चा बाजुओं, चेहरे और टांगों को खरोंचने जैसे संकेत दिखा रहा हो, तो आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
आपको बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत कब होती है?
जब आप निम्न में से कोई भी लक्षण देखते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए या अपने बच्चे को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना चाहिए।
- खून की उल्टी
- उच्च बुखार के साथ दस्त
- 12 घंटे से अधिक के लिए निरंतर उल्टी
- अनियमित हृदय की धड़कन
- निर्जलीकरण के संकेतों जैसे पेशाब की कमी, उनींदापन, आँखों में सूजन, या खड़े हो पाने में परेशानी इत्यादि जैसे संकेतों पर भी ध्यान दें।
फूड पाइज़निंग के लिए उपचार
फूड पाइज़निंग एक प्राकृतिक प्रक्रिया का पालन करती है और ठीक होने में अपना पूरा समय लेती है। लेकिन डॉक्टर द्वारा निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं की खुराक सावधानीपूर्वक लेते रहने से स्थिति को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।
अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।
निर्जलीकरण के मामलों में, रिहाइड्रेशन लवण या रिहाइड्रेशन इंफ्यूजन के साथ उपचार की आवश्यकता होती है।
किसी भी मामले में, डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे को कोई दवा नहीं देनी चाहिए। चाहे सामान्य हो या गंभीर, फूड पाइज़निंग के किसी भी लक्षण के पाए जाने पर, डॉक्टर से जरूर मिलें।
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