शिशु के शौच के रंग में होने वाले परिवर्तन

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आपके शिशु के पैदा होने से लेकर उसके शुरुआती कुछ महीनों तक आप उसके शौच में कई तरह के परिवर्तन देखने की उम्मीद कर सकती हैं। जैसे-जैसे आपका शिशु बड़ा होता जाता है, उसके शौच करने की गिनती से लेकर शौच के रंग में भी कई प्रकार के बदलाव आते हैं।

अगर बाल रोग विशेषज्ञों की मानें, तो बच्चे का डायपर उसकी सेहत के बारे में बहुत कुछ ब्यान कर देता है। आपका बच्चा एक दिन में कितनी बार डायपर गिला करता है और कितनी बारी शौच करता है, यह आंकड़े उसकी सेहत के बारे में काफी कुछ बता देते हैं। अगर शौच के रंग के बारे में बात की जाए, तो यह कई बार परिवर्तित होता है। जब भी बच्चे को स्तनपान के इलावा फार्मूला दूध दिया जाता है या छह महीने की अवधि के बाद जब उसे ठोस आहार देना शुरु किया जाता है, शिशु की शौच के रंग में परिवर्तन देखा जा सकता है। आज हम शिशु की शौच के रंग में होने वाले परिवर्तन के बारे में बात करेंगे।

यहाँ पर गौर करने वाली एक बात यह भी है कि अगर आपका शिशु पांच दिन तक शौच ना भी करे, तो कोई समस्या वाली बात नहीं। परन्तु अगर छठे दिन भी उसको शौच ना हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ से मिलने में देर न करें। यह जानने के लिए कि क्या आपके शिशु का शौच सामान्य है या नहीं, यह लेख अंत तक ज़रूर पढ़े।

नवजात शिशु का शौच

बच्चे के जीवन के शुरुआती दिनों में उसके शौच का रंग चिपचिपा हरे-काले रंग जैसा होता है। इसे मेकोनियम कहा जाता है। शिशु जब माता के गर्भ में होता है तो कई प्रकार के एमनियोटिक तरल पदार्थ, स्रावऔर फैटी एसिड्स उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, पर जन्म के बाद यह सब शौच के रूप में बाहर आते हैं। अतः घबराने की कोई आवश्यकता नही है।

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हरे रंग का शौच

शिशु के हरे रंग का शौच करने के कारण बहुत ही कम होते हैं। अगर आप अपने शिशु को फार्मूला दूध दे रहीं हैं, तो उसके शौच के हरे रंग का होने का कारण, फार्मूला दूध में आयरन (आइरन) की उपस्थिति भी हो सकता है। लेकिन अगर आप अपने शिशु को कोई फार्मूला दूध नहीं दे रहीं हैं, तो उसके शौच के हरे रंग का होने का कारण फॉरमिल्क और हिन्डमिल्क का असंतुलन भी हो सकता है। आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि स्तनपान के दौरान आपके शिशु को दोनों प्रकार का (गाढ़ा और पतला) दूध मिले। ऐसा सुनिश्चित करने के लिए आप अपने शिशु को एक स्तन से दूसरे स्तन पर तभी लेकर जाएँ, जब उसने पहले स्तन को पूरी तरह से खाली (उसमे दूध शेष ना हो) कर दिया हो।

सरसों के रंग जैसा पीला शौच

शिशु के इस रंग का शौच करना भी बहुत ही सामान्य बात है। अगर आप अपने शिशु को स्तनपान करवा रही हैं, तो आपके शिशु को सरसों के रंग जैसा पीला शौच होगा। यहाँ सबसे बेहतरीन बात यह है कि इस शौच की कोई दुर्गन्ध नहीं होती। आपको शिशु के शौच में कुछ बीज के आकार के अवशेष देखने को भी मिल सकते हैं। असल में यह दूध का वह हिस्सा (फैट) है, जिसे पचा पाने में आपका शिशु असमर्थ होता है। यह भी एक सामान्य बात है।

शौच में खून का आना

अगर आपके निप्पल फटे हुए या क्षतिग्रस्त होने के बाद भी आप अपने शिशु को स्तनपान करवाना जारी रखती हैं, तो इस बात की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता कि स्तनपान करते वक़्त आपके शिशु के मुंह में दूध के इलावा खून भी अंदर चला जाए। हालांकि, इसमें डरने जैसा कुछ नहीं है, परन्तु, जब आप शिशु के शौच में खून के साथ बलगम जैसा कुछ देखें, तो किसी बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श ज़रूर करें। शौच में बलगम की उपस्थिति के कई कारण हो सकते हैं, और एक बाल रोग विशेषज्ञ ही इसके सही कारण के बारे में बता सकता है।

फार्मूला फीड दिए जाने पर शिशु का शौच

जैसा मैंने उपर भी लिखा है, जिस शिशु को फार्मूला दूध दिया जाता है, उसका शौच चिपचिपे हरे रंग का हो सकता है। इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ऐसे शिशु की शौच से बहुत ज़्यादा दुर्गन्ध आती है। लेकिन अगर शौच की दुर्गन्ध बहुत ज़्यादा विचित्र लगे, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह करना ना भूलें।

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पतला शौच

कई बार आपके शिशु को पतला शौच भी हो सकता है। अगर यह एक-आध बार हो, तो इसमें ज़्यादा घबराने की बात नहीं है। परन्तु, अगर आपके शिशु को पतला शौच बहुत ज़्यादा होने लगे, तो बिना देर किए अपने बाल रोग विशेषज्ञ से ज़रूर मिलें।

पतला शौच होने के कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है कि आपका शिशु बहुत छोटा है और आपने उसे जो फार्मूला दूध देना आरम्भ किया है, वह उसे पचा नहीं पा रहा है या वह फार्मूला दूध आपके शिशु के लिए अनुकूल नहीं है। पतली शौच का एक और कारण है, शिशु के दांतों का आना। आपको ऐसा लग सकता है कि जैसे शिशु की दस्त लगे हों, पर दांत निकलने के समय पतली शौच का आना बहुत ही सामान्य बात है।

जब शिशु को दस्त लगते हैं, तो उसके शौच का रंग बदल कर हरा, पीला, या भूरा हो जाता है और यह सब रंग परिवर्तन संक्रमण की ओर भी इशारा करते हैं। ऐसे में, किसी बाल रोग विशेषज्ञ से मिलना बहुत ज़रूरी है।

आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आपका शिशु दिन में कितनी बारी और कब शौच करता है। इसके साथ ध्यान रखें कि अपने शिशु की शौच को ज़रूर जाँचें ताकि आप यह सुनिश्चित कर पाएँ कि आपका शिशु स्वस्थ एवं तंदुरुस्त है।

जब भी आपको अपने शिशु के शौच के बारे कुछ भी अटपटा या विचित्र लगे, तो बिना देर किए, किसी बेहतरीन बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें।

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