बच्चों की कहानियां – बच्चों को कहानियाँ सुनाना क्यों महत्वपूर्ण है

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Children Stories - Why Is Storytelling Important To Children
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Shruti Singh

Shruti Singh

A proud mom to a beautiful little baby girl, learning the art of parenting one day at a time. Experiencing the joys of being a mom for the first time. Excited and anxious about the journey. Takes being a stay-at-home mom as a challenge and there's nothing she would change about it.

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बेशक किसी की भी ज़िन्दगी के सबसे यादगारी और खूबसूरत पल वही होंगे, जब दादी और नानी से कहानियां सुना करते थे। अगर हम अपने बचपन को याद करें, तो हम खुद भी कई प्रकार की कहानियां सुनकर ही बड़े हुए है। उन सब कहानियों का हमारे व्यक्तित्व पर कुछ न कुछ असर तो देखने को मिलता ही है। आइए जानते हैं कि बच्चों को कहानियाँ सुनाना क्यों महत्वपूर्ण है।

आजकल तो कहानियां सुनाने के कई अलग- अलग तरीके हैं, जिनकी वजह से अपने बच्चों को कहानियाँ सुनाना और भी आसान हो गया हैं। कहानियां हमारी सोच को किस तरह से प्रभावित कर सकती है, यह जानने के बाद कहानियाँ सुनाने के विचार को अनदेखा नहीं किया जा सकता। अगर आपको लगता है कि कहानियाँ सुनाना समय बेकार करना है, तो मैं आपसे आग्रह करुँगी कि एक बार मेरा यह लेख ज़रूर पढ़ लें।

कहानियाँ सुनाने से आप अपने शिशु के दिमाग को काम में लगाती हैं

कहानियों का आपके बच्चे की उम्र से कुछ लेना-देना नहीं होता, फिर चाहे आपका बच्चा एक छोटा शिशु हो या फिर बड़ा। आप जब भी उसे कहानियाँ सुनाती हैं, आप उसके दिमाग को काम में लगाती हैं। बच्चों को कहानियाँ सुनाना आपके शिशु के लिए दिमाग की एक कसरत जैसा ही है। मैं मानती हूँ कि अगर आपका बच्चा बहुत छोटा है, तो कहानी सुनाने से कोई फर्क नहीं पड़ता, पर यह आगे चलकर उसकी शब्दावली को बढ़ाने में मदद करता है।

इस छोटी सी उम्र में, आपके द्वारा इस्तेमाल की गई शब्दावली उसके लिए एक विदेशी भाषा जैसे होगी। लेकिन अगर कहानी सुनाते वक़्त आप अपने शिशु को उन शब्दों के अर्थ समझाएंगी, तो यह आगे चल कर उसके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

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यह वैज्ञानिक तौर पर भी सिद्ध हो गया है कि भले ही छोटा होने के कारण बच्चा आपकी शब्दावली को समझ न पाए, पर आप को यह जानकार हैरानी होगी कि वह आपकी उम्मीद से अधिक शब्दों को पकड़ लेता है।

कहानियाँ बच्चों की कल्पना शक्ति के लिए अद्भुत काम करती हैं

यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा कल्पनाशील और अपनी बातों को आसानी से कह पाने वाला हो, तो माता-पिता के रूप में, आपको इस पर व्यक्तिगत रूप से काम करना पड़ेगा। जो कुछ भी बच्चा अपने जीवन के प्रारंभिक चरणों में सीखता है, उन सब बातों का आगे चल कर उसके जीवन में बहुत प्रभाव पड़ता है।

अगर आप चाहतें है कि बड़े होने पर वह खुले विचारों वाले बनें, तो बच्चों को कहानियाँ सुनाना आपके लिए बहुत मददगार साबित हो सकता हैं। कहानियों से ही उनकी कल्पना शक्ति में बहुत वृद्धि होती है और वह अपने दिमाग में नए-नए विचारों को जन्म दे पाते हैं।

बहुत बार हम अपनी बात सिर्फ इसलिए नहीं कह पाते क्योंकि हमारे पास शब्द नहीं होते। ऐसी स्तिथि में, कहानियों से बेहतर कुछ नहीं होता।

शिशु नैतिक सबक आसान तरीके से सीख जाते हैं

चाहे आप पुस्तक से एक कहानी पढ़ें या उन्हें अपने अनुभव से मौखिक रूप से कुछ कहें, हर कहानी में एक सबक है। कहानियों के बारे में सबसे अच्छी बात ये होती है कि इससे सबक आसान तरीके से सीखा जा सकता है।

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जीवन में हमें कई तरह के उतार-चढ़ाव से गुज़रना पड़ता है और ये कहानियां, बच्चों को वास्तविकता का सबसे अच्छे और संभव तरीके से सामना करने के लिए तैयार करती हैं। इनकी मदद से, शिशु आपने जीवन के शुरूआती चरणों में ही अच्छे और बुरे के बीच फर्क करना सीख जाते हैं।

कहानियों से पढ़ने में रूचि बढ़ती है

मैं यहां पुस्तकों को पढ़ने के फायदे पर चर्चा नहीं करना चाहती क्योंकि हम सभी जानते हैं कि वे हमारे लिए कितनी फायदेमंद होती हैं। जब शिशु खुद से छोटी-छोटी कहानियों को पढ़ना शुरू करते हैं, तो आगे चलकर उनमे अपने आप पुस्तकों के लिए रूचि विकसित हो जाती है।

मैं ऐसी कई माताओं को जानती हूँ, जिन्होंने अपने बच्चों को काफी छोटी उम्र से कहानी सुनानी शुरू की थी और आज जब उनके बच्चे काफी बड़े हो चुके हैं, उनकी अन्य आदतों में पढ़ने की आदत भी शामिल है।

शिशु बेहतर श्रोता बन जाते हैं

अगर आप चाहते हैं कि बड़ा हो कर आपका बच्चा एक बेहतर श्रोता बने, तो आप उन्हें नियमित रूप से कहानियां सुनाएँ। जब आपका शिशु दैनिक या नियमित आधार पर कहानियों को सुनता है, तो उनकी धैर्यपूर्वक तरीके से बात को सुनने की क्षमता बढ़ जाती है।

यकीन मानिएं, कहानियां बच्चों में अच्छे मूल्यों को प्रोत्साहित करने में मदद करती हैं।

इसलिए मैं सुझाव देती हूं कि आप अपने बच्चे को कहानी सुनाना शुरू कर दें क्योंकि शिशु के मानसिक विकास के लिए बच्चों को कहानियाँ सुनाना एक बेहतर और सस्ता निवेश कोई नहीं है।

हमेशा याद रखें कि कहानियाँ सुनाए जाने के लिए कोई भी बच्चा बहुत छोटा या बड़ा नहीं होता। इस बात में भी कोई दो-राय नहीं है कि छोटे बच्चों के साथ आपको थोड़ी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। पर इन सब के बावजूद, जो फर्क आप अपने बच्चे के व्यक्तित्व पर देखेंगी, उससे आप निराश नहीं होंगी।

क्या आप भी आपने बच्चे को कहानियाँ सुनाती हैं? क्या आपको लगता है कि ऐसे करने से उनके व्यक्तित्व में कोई फर्क आया है? हमसे अपने अनुभव ज़रूर बांटें। हमें और अन्य माताओं को आपके अनुभव जानकर बेहद ख़ुशी होगी और प्रोत्साहन मिलेगा।

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