अपने बच्चों को ठंड और फ्लू से कैसे सुरक्षित रखें

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Simranjit Kaur

Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. Putting my qualifications into practice. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day. Putting away childish ways to make room for my child’s ways. Trying my level best to be a best mom.

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सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है और कम तापमान और वायुमंडलीय दबाव में अचानक परिवर्तन की वजह से वास्तव में वायरल संक्रमण बहुत ज़्यादा फैल रहा है। ऐसी स्थिति में, नवजात शिशु, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह से विकसित नहीं है, में वयस्कों के मुकाबले संक्रमण का खतरा ज़्यादा होता है। आइए हम जानते हैं कि अपने बच्चों को ठंड और फ्लू से कैसे सुरक्षित रखें।

इसके समाधानों को समझने से पहले, हमें इस संक्रमण की मूल बातें समझने की आवश्यकता है।

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1ठंड या फ्लू क्या है?

मेरा विश्वास है, हम सभी जानते हैं कि इस तरह के वायरल श्वसन संक्रमण बहुत जल्दी फैलते हैं क्योंकि यह एक-दूसरे के सम्पर्क में आने से ही फ़ैल जाते हैं। असल में, ठंड और फ्लू में कई सामान्य विशेषताएं हैं । उदाहरण के लिए, इन दोनों को वायरस द्वारा उत्पादित किया जाता है, दोनों ही खांसी, गले में खराश, नाक की बाधा और नाक के बहने जैसी समस्याओं को जन्म देते हैं।

इन्फ्लूएंजा को साधारण भाषा में फ्लू के नाम से जाना जाता है और यह इन्फ्लूएंजा वायरस द्वारा निर्मित होता है। इन्फ्लूएंजा आमतौर पर सर्दियों के दौरान होता है। जबकि, सर्दी-जुखाम वर्ष के किसी भी महीने में हो सकता है।

इन्फ्लूएंजा और सर्दी के बीच एक बड़ा अंतर है। इन्फ्लूएंजा के सामान्य लक्षण हैं, जैसे कि बहुत तेज़ बुखार जो कि 3 से 5 दिन तक रह सकता है, ठंड लगना, थकान, सिरदर्द, और कुछ मामलों में, मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है। कई बार इन्फ्लूएंजा भयानक न्यूमोनिया भी बन जाता है।

2उपचार

इन्फ्लूएंजा के मामले में, टीकाकरण सबसे बेहतर उपाय है। चूंकि इन्फ्लूएंजा विशेष रूप से ठंड के मौसम में होता है, इसलिए टीकाकरण मौसम शुरू होने से पहले दिया जाना चाहिए। बच्चे के सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए, आपको एक डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और आपको डॉक्टरी सलाह के बिना कोई भी दवा नहीं देनी चाहिए।

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कई बार देखा जाता है कि बहुत से माता-पिता सर्दी-जुखाम से परेशान बच्चों को खुद ही पेरासिटामोल की बूंदें, नेसल स्प्रे की बुँदे, और कई बार तो नेब्यूलाइजेशन जैसी प्रक्रियाएं भी खुद ही देने लगते हैं। लेकिन, इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक डॉक्टर ही आपके बच्चे का स्वास्थ्य जांचने के बाद सही दवा और खुराक लिख सकता है।

यहाँ पर आपको याद रखना होता है कि सर्दी और फ्लू वायरस द्वारा पैदा होते हैं, अतः एंटीबायोटिक सही समाधान नहीं है क्योंकि एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण में प्रभावी नहीं होते।

3शीतकालीन रोग से बच्चों को बचाए रखने के लिए क्या किया जा सकता है?

  1. छह महीने से कम उम्र के शिशुओं के मामले में, सबसे बेहतर तो यही रहता है कि आप ठीक समय पर उनका टीकाकरण करवाएं और जितना हो सके उनकों गर्म रखें।
  2. यदि परिवार का कोई भी सदस्य इस तरह के संक्रमण से पीड़ित हैं, तो उन्हें बच्चों से उचित दूरी पर रखें। अन्यथा, छोटे बच्चे भी संक्रमित हो सकते हैं। याद रखें, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अभी तक विकसित नहीं हुई है, इसलिए उनके संक्रमित होने की संभावनाएं प्रबल हैं ।
  3. वयस्कों की तरह, बच्चों को अच्छी नींद की ज़रूरत होती है इसलिए, सुनिश्चित करें कि सर्दी की वजह से उनकी नींद ख़राब न हो।
  4. शिशु जो पहले से ठोस और अर्द्ध ठोस भोजन पर हैं, एक संतुलित आहार सबसे अच्छा समाधान है। उन्हें एक संतुलित और स्वस्थ आहार प्रदान करें जो कि विटामिन से समृद्ध हो और जिसमे सब्जियां और फल भरपूर मात्रा में हो।
  5. आप उन्हें विटामिन युक्त पेय दे सकते हैं जैसे कि प्राकृतिक रस और अन्य फल जैसे कि कीवी, जामुन आदि। सबसे अच्छा ब्लूबेरी है, जिन्हें प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह भी जाना जाता है।
  6. अपनी और शिशु की स्वच्छता के बारे में कभी भी कोई समझौता ना करें।
  7. बाल रोग विशेषज्ञ हमेशा फ्लू के टीके की सिफारिश करते हैं हालांकि, ज्यादातर माता-पिता मानते हैं कि ये टीके बेकार हैं और आवश्यक नहीं हैं। लेकिन, मेरे हिसाब से इन टीकों को लगवाने में कोई नुकसान नहीं है।
  8. इसी समय, अति-संरक्षण की सिफारिश भी नहीं की जाती है। बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए, आपको सही समय पर, उसे सैर इत्यादि के लिए ले जाना चाहिए।
  9. सर्दियों के कपड़ों के महत्व को अनदेखा न करें। बच्चों को गर्म कपड़े जैसे दस्ताने, गर्दन को कवर करने वाले स्कार्फ, और उनके सिर के लिए टोपी इत्यादि पहनाना न भूलें।
  10. सर्दियों में यदि आपका बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो उसे कुछ गर्म पेय दें, जैसे कि सूप इत्यादि। इनसे शिशुओं का शरीर अंदर से गर्म रहता है, खासकर जब वे बाहर ठंड से आते हैं।

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एक बार फिर, मैं बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना शिशुओं को किसी भी दवा देने की सिफारिश नहीं करुँगी। यदि आप ठंड या फ्लू (छाती की रुकावट, खांसी, गले में खराश, नाक की बाधा, नाक का बहना, बुखार) के किसी भी लक्षण को देखती हैं, तो हालात ज़्यादा ख़राब होने से पहले एक बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें।

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