बच्चे ने अभी तक रेंगना या सहारा लेकर बैठना शुरू क्यों नहीं किया?

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प्रश्न – मेरा पांच महीने का शिशु अभी भी रेंगने या बैठने (सहारा ले कर) में सक्षम नहीं है। क्या मुझे चिंतित होना चाहिए?

जब आपका बच्चा पहली बार खुद से बैठने या रेंगने का प्रयास करता है, तो वह पल एक बहुत ही यादगारी पल होता है। जहाँ कुछ बच्चे 4.5-5 महीने की उम्र से ही खुद से बैठने (किसी सहारे की मदद से) लगते हैं, वहीँ दूसरी और कुछ बच्चों को थोड़ा अधिक समय लग जाता है। हमने पहले भी कई बार अपने लेखों में कहा है कि हर बच्चे की विकास दर अलग होती है अर्थात कुछ बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास जल्दी हो जाता है, और कुछ को समय लगता है।

ज़रूर पढ़े – बोलने में देरी – मेरे 2.5 साल के बच्चे ने अभी तक बोलना क्यों शुरू नहीं किया। क्यों?

इसलिए माँ-बाप होने के नाते हमें अपने बच्चे की दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए। हर बच्चा ख़ास होता है। परन्तु, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि जब आप निर्धारित समय पर अपने बच्चे में होने वाले विकास में देरी देखते हैं, तो चिंता हो ही जाती है। ऐसे में अगर बाल रोग विशेषज्ञों की मानी जाए, तो जब तक आपको बच्चे में कुछ खास किस्म के लक्षण न दिखें, उसके विकास के चरणों को लेकर आपको चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं होती। कुछ माता-पिता इस बात से चिंतित होते है कि उनके बच्चे ने अभी तक रेंगना या सहारा लेकर बैठना शुरू क्यों नहीं किया।

अगर आप भी इस बात से चिंतित है, तो आप नीचे दिए कुछ सुझावों से कुछ हद तक इनसे मुक्ति पा सकते हैं।

  1. अपनी निगरानी में, जितना संभव हो उतना अपने बच्चे को पेट के बल (खाने के तुरंत बाद नहीं) लिटाएं। जब बच्चों को पेट के बल लिटाया जाता है, तो न केवल उनकी गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, बल्कि उन मांसपेशियों को भी मदद मिलती है, जो बच्चे की रेंगने में मदद करती हैं।
  2. हम मानते हैं कि SIDS (Sudden Infant Death Syndrome) की वजह से बहुत से माँ-बाप बच्चे को पीठ के बल ही लिटाना सही समझते हैं और यह सही भी है। परन्तु फिर भी दिन में एक बार आप अपने शिशु को (थोड़े समय के लिए ) पेट के बल लिटा सकते हैं। इससे बच्चा आगे बढ़ने के लिए अपने हाथों और पैरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होगा।
  3. दिन में एक बार अपने बच्चे को खुद से चीज़ों को देखने दें। हर समय उनको पालने, झूले या वॉकर में बिठाने से अच्छा है कि अपनी निगरानी में उन्हें खुद से चीज़ों को समझने दें। ऐसा माना जाता है कि जितना हम बच्चों को बाँध कर रखते हैं, उतना ही उनमें खुद से कुछ करने कि रूचि कम हो जाती है।
  4. जब आप बच्चे को अपनी निगरानी में पेट के बल लिटाती हैं, तो कोशिश करें कि उससे कुछ इंच की दुरी पर उसका पसंदीदा खिलौना रख दें। इससे बच्चा उस खिलौनें तक पहुंचने का अभ्यास करेगा और ऐसा करते वक़्त अपनी मॉस-पेशियों में हरकत करेगा। इसमें भी कोई आशंका नहीं है कि शुरू में उस खिलौने तक न पहुँच पाने की वजह से आपका बच्चा गुस्सा दिखाएगा या झुंझलाहट का प्रदर्शन करेगा। परन्तु अगर आप निरंतर इसका अभ्यास करते रहेंगे, तो कुछ समय बाद ही आप काफी सकरात्मक बदलाव देखेंगे।
  5. जब आपका बच्चा रेंगने का प्रयास करने लगता है, तो उसे प्रोत्साहन के रूप में हल्का सा धक्का देने के लिए उसके पैरों के नीचे अपना हाथ रखने की कोशिश करें। ऐसा करते वक़्त पूरी संभावना है कि आपका बच्चा गिर सकता है सकता। लेकिन कम से कम उसकी रेंगने की यात्रा के लिए यह एक अच्छी शुरुआत होगी।

यहाँ मैं एक और बात कहना चाहूंगी कि ज़्यादातार बच्चे 6 से 7 महीने की उम्र में बैठने लगते हैं। लेकिन कुछ बच्चे विकास के इस चरण में देरी दिखाते हैं।

मेरे बच्चे ने भी 8 महीने की उम्र में रेंगना शुरू कर दिया था, जबकि मेरी भतीजी ने इस चरण में देरी दिखाई थी, और 11.5 महीने की उम्र में खुद से चलने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाना शुरू दिए थे। मेरे इस उदाहरण का मतलब यह है कि चाहे आपके बच्चे ने विकास के किसी चरण में देरी दिखाई हो, पर यह चिंता का विषय बिलकुल नहीं है।

ज़रूर पढ़े – 7 महीने के शिशु के स्वास्थ्य और विकास के बारे में

ध्यान रहे अगर आपका बच्चा गलफुल्ला अर्थात वज़न में ज़्यादा है, तो उसका वज़न भी उसकी इस देरी का एक प्रमुख कारण हो सकता है। ऐसा देखा जाता है कि जब एक गलफुल्ला बच्चा खुद से बैठने का प्रयास करता है, तो वह अपने वज़न की वजह से दूसरी और लुढ़क जाता है। हालांकि, इसको भी नकारात्मक रूप से नहीं देखना चाहिए क्योंकि हर बच्चा अलग होता है। गलफुल्ला बच्चा भी समय के साथ रेंगना और खुद से बैठना सीख ही जाता है।

क्या आपके बच्चे ने भी विकास के किसी चरण में देरी दिखाई थी? क्या उसके ऐसा करने से आप भी चिंतित हुई थी? ऐसे में आपने बच्चे को प्रोत्साहित करने के लिए क्या किया था? इस विषय में अपने अनुभव हमारे पाठकों से ज़रूर बांटें।

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